Bihar Board Class 9th chapter 2 अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम | Ameriki swatantrata sangram class 9th History Notes & Solution
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Bihar Board Class 8th Science Ch 17 kishorvasta ki aur Notes | किशोरावस्‍था की ओर

आज के इस पोस्ट में हमलोग कक्षा 8वीं विज्ञान का पाठ ‘किशोरावस्था की ओर’ का नोट्स को देखने वाले है। kishorvasta ki aur

Bihar Board Class 8th Science Ch 17 kishorvasta ki aur Notes | किशोरावस्‍था की ओर

किशोरावस्था की ओर

👉 मनुष्य का जीवनकाल मुख्य रूप से चार अवस्थाओं से गुजरता है।
(i) शैशवावस्था
(ii) बाल्यावस्था
(iii) किशोरावस्था
(iv) प्रौढ़ावस्था

(i) शैशवावस्था किसे कहते है?
उत्तर– जन्म से लेकर 5 वर्ष की अवधि (समय) को शैशवावस्था कहते है।

(ii) बाल्यावस्था किसे कहते है?
उत्तर– 6 वर्ष से लेकर 11 वर्ष की अवधि (समय) को बाल्यावस्था कहते है।

(iii) किशोरावस्था किसे कहते है?
उत्तर– 11 वर्ष से लेकर 19 वर्ष की अवधि (समय) को किशोरावस्था कहते है। इस अवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव होते है। किशोरावस्था के किशोर (लड़का) एवं किशोरियों (लड़की) को टीनएजर्स भी कहा जाता है।

(iv) प्रौढ़ावस्था किसे कहते है?
उत्तर– 19 वर्ष के बाद की अवस्था को प्रौढ़ावस्था कहते है।

किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन (बदलाव)

(i) लंबाई में = किशोरावस्था में शरीर की हड्डियां तेजी से बढ़ती हैं। जिससे हमारे शरीर का लंबाई भी बढ़ता है। और कोई भी लड़का या लड़की 18 वर्ष तक ही बढ़ती है।

(ii) शारीरिक बनावट में = किशोरावस्था में लड़का का कंधा और सीना चौड़ा हो जाता है। और लड़कियों के कमर के नीचे का भाग चौड़ा हो जाता है। और लड़कों के चेहरे पर मूंछ तथा दाढ़ी निकल आता है। इसके अलावा लड़का और लड़की के जांघ के ऊपर तथा कांख में बाल निकल आता है। और लड़कियों में स्तन का उभार दिखने लगता है।

(iii) स्वर (आवाज) में = किशोरावस्था में लड़कों का स्वर यंत्र (लैरिन्क्स) बड़ा हो जाता है। और उसके बाद यह स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है, इसी उभार को कंठमणि (एडम्स ऐपल) कहते है। लेकिन लड़की का स्वर यंत्र छोटा होता है। और इसकी कारण लड़का का गहरा और लड़की का आवाज पतला हो जाता है।

(iv) स्वेद एवं तैल ग्रंथियों तथा जनन अंग में = किशोरावस्था में स्वेद एवं तैल ग्रंथियां बढ़ जाती है, जिस कारण हमारे चेहरे में फुंसी और पिंपल तथा काले-उजले दाग निकलने लगते है। किशोरावस्था के अंत तक नर और मादा का जनन अंग पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है। और नर में शुक्राणु तथा मादा में अंडाणु का निर्माण होना शुरू हो जाता है।

(v) मानसिक एवं संवेदनात्मक विकास = किशोरावस्था में लड़का और लड़कियों की सोचने और समझने की क्षमता बढ़ जाती है। तथा नए-नए चीजों को सीखने की क्षमता बढ़ जाती है।

द्वितीयक लैंगिक लक्षण

☞ किशोरावस्था में वृषण द्वारा शुक्राणु और अंडाशय द्वारा अंडाणु उत्पन्न होने लगते है। तथा लड़कों में मूंछ-दाढ़ी और लड़कियों में स्तन दिखाई देखने लगते है। इन्हीं लक्षणों को गौण (द्वितीयक) लैंगिक लक्षण कहते है।

➢ किशोरावस्था में वृषण द्वारा पुरुष हारमोन निकलता है, जिसे टेस्टेस्टोरान कहा जाता है। और इसी हार्मोन के कारण लड़कों में मूँछ और दाढ़ी निकलने लगती है। किशोरावस्था में अण्डाशय द्वारा स्त्री हारमोन निकलता है, जिसे एस्ट्रोजेन कहते है। और इसी हार्मोन के कारण लड़कियों में स्तन का विकास होने लगता है।

पीयूष ग्रंथि का काम

(i) यह दिमाग से जुड़ी एक छोटी ग्रंथि है।

(ii) यह दूसरे ग्रंथियों को हार्मोन बनाने का आदेश देती है। जैसे अंडाशय में अंडाणु और वृषण में शुक्राणु के परिपक्व होने को नियंत्रित करती है।

(iii) यह वृद्धि हार्मोन भी बनाती है जो शरीर की लंबाई बढ़ने में मदद करता है।

➢ थायरॉइड ग्रंथि थायरॉक्सिन हार्मोन बनाती है जिसकी कमी से गला फूल जाता है (गॉयटर रोग)।

☞ अग्न्याशय इन्सुलिन बनाता है, जो खून में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करता है, और इसकी कमी से मधुमेह हो जाता है।

👉 एड्रिनल ग्रंथि एड्रिनेलिन हार्मोन बनाती है जो डर, गुस्सा और उत्तेजना में काम आता है, और यह खून में नमक का संतुलन भी बनाए रखती है।

कायांतरण = मेंढक के टैडपोल (लारवा) का वयस्क मेंढक में बदलने की प्रक्रिया को कायांतरण कहते है। कीटों में कायांतरण का नियंत्रण कीट हार्मोन द्वारा होता है।

मानव में जनन अवधि

👉 जब लड़कों में वृषण द्वारा शुक्राणु और लड़कियों में अंडाशय द्वारा अंडाणु उत्पन्न होने लगते है। तब वे प्रजनन योग्य हो जाती है।

☞ किशोरावस्था में महिलाओं में अंडाशय से निकलने वाले अंडाणु गर्भाशय में चला जाता है। जिसके कारण गर्भाशय की दीवार रक्त के द्वारा मोटी होने लगती है। और जब अंडाणु का निषेचन नहीं हो पाता है, तब उस स्थिति में गर्भाशय का मोटा दीवार टूटने लगता है, जिसके कारण महिलाओं की योनि से खून निकलने लगता है, इसे ही ऋतुस्त्राव (रजोधर्म) कहते हैं। ऋतुस्त्राव लगभग 28 से 30 दिनों में एक बार होता है।

➢ ऋतुस्त्राव, स्त्रियों में 11-12 वर्ष की आयु से शुरू होकर 45-50 वर्ष की आयु तक चलता रहता है। पहला ऋतुस्राव चक्र किशोरावस्था में ही होता है, इसे रजोदर्शन कहते हैं। 45- 50 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते यह चक्र रुक जाता है, इसे रजोनिवृत्ति कहते हैं।

प्रजनन एवं स्वास्थ्य

👉 ऋतुस्राव के दौरान किशोरियों (लड़कियों) को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। स्राव(खून) को अवशोषित करने के लिए कीटाणु रहित मुलायम सूती कपड़ा का उपयोग करना चाहिए। और यह कपड़ा सूखा हुआ होना चाहिए। और इन कपड़े को गर्म पानी में डिटॉल डालकर धोना चाहिए। गन्दगी से दिनाय, खुजली तथा अन्य यौनरोग होने की आशंका बनी रहती है।

☞ शिशु के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम (सबसे अच्छा) आहार है। और जन्म के तुरंत बाद शिशु को माँ का दूध पिलाना चाहिए, क्योंकि यह दूध बच्चों को रोगों से लड़ने की शक्ति देता है। और मां को 9 महीने तक प्रोटीन, कार्बोहाइडेड, विटामिन वाले भोजन खिलाना चाहिए।

➢ लड़कियों के विवाह के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़कों के विवाह के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय की गई है।

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दोस्तों उम्मीद करता हूं कि ऊपर दिए गए कक्षा 8वीं के विज्ञान के पाठ 17 किशोरावस्था की ओर (kishorvasta ki aur) का नोट्स और उसका प्रश्न को पढ़कर आपको कैसा लगा, कॉमेंट करके जरूर बताएं। धन्यवाद !

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