Bihar Board Class 9th chapter 2 अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम | Ameriki swatantrata sangram class 9th History Notes & Solution
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Bihar Board Ncert Class 9th Science Physics Chapter 6 ध्वनि | Class 9th Sound Objective Question & Notes

आज के इस पोस्ट में हमलोग कक्षा 9वीं भौतिक विज्ञान का पाठ ‘ध्वनि’ का नोट्स को देखने वाले है। Class 9th Sound

Bihar Board Ncert Class 9th Science Physics Chapter 6 ध्वनि | Class 9th Sound Objective Question & Notes

ध्वनि (Sound)

प्रश्न 1. ध्वनि किसे कहते है?
उत्तर– ध्वनि एक प्रकार की ऊर्जा है, जो किसी वस्तु के कंपन करने से पैदा होती है। ये कंपन तरंगों के रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं।

☛ ध्वनि ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों में चल सकती है, लेकिन निर्वात (खाली जगह) में ध्वनि उत्पन्न नहीं होती है। सबसे अधिक तेज ध्वनि ठोस में उत्पन्न होती है। और सबसे कम गैस में उत्पन्न होती है। ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

☞ ध्वनि की चाल वायु में करीब 330 m/s, पानी में करीब 1500 m/s और लोहे में करीब 5000 m/s होती है।

👉 तरंग दो प्रकार की होती है।

(i) यांत्रिक तरंग :- वैसे तरंगें जिसके संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है, उसे यांत्रिक तरंग कहते है। जैसे– ध्वनि तरंगें, भूकंपीय तरंगें

(ii) अयांत्रिक तरंग (विद्युत चुंबकीय तरंग) :- वैसे तरंग जिसके संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है, उसे अयांत्रिक तरंग कहते है। और यह केवल निर्वात में संचारित होता है। जैसे– प्रकाश तरंगें, रेडियो तरंगें

⪼ यांत्रिक तरंग दो प्रकार की होती है।

(i) अनुदैर्ध्य तरंग :- वैसे तरंगें जिसमें माध्यम के कणों का दोलन (कंपन) तरंगों की दिशा के समांतर होता है, उसे अनुदैर्ध्य तरंग कहते है। इसमें संपीड़न और विरलता बनती है।

(ii) अनुप्रस्थ तरंग :- वैसे तरंगें जिसमें माध्यम के कणों का दोलन (कंपन) तरंगों की दिशा के लंबवत होता है, उसे अनुप्रस्थ तरंग कहते है।

☞ अनुप्रस्थ तरंग ठोस और द्रव में संचारित हो सकता है, जबकि अनुदैर्ध्य तरंग ठोस, द्रव तथा गैस तीनों में संचारित हो सकता है। इसलिए ध्वनि एक अनुदैर्ध्य तरंग है।

प्रश्न 2. दोलन (कंपन) किसे कहते है?
उत्तर– किसी वस्तु का अपनी माध्य स्थिति से बार-बार इधर-उधर गति करने को कंपन कहते है। और इसी गति को दोलन गति भी कहते हैं।

प्रश्न 3. आवृत्ति किसे कहते है?
उत्तर– प्रति सेकेण्ड होने वाले दोलनों (कंपनों) की संख्या को दोलन की आवृत्ति कहते हैं। इसे v (न्यू) से सूचित किया जाता है। आवृत्ति को SI मात्रक हर्ट्ज (Hz) होता है। 1 Hz आवृति एक दोलन प्रति सेकण्ड के बराबर होती है। जितना चक्कर लगता है, वहीं उसका आवृति होता है।

आवृति (v) = 1/ T (आवर्तकाल)

प्रश्न 4. आवर्तकाल किसे कहते है?
उत्तर– कंपित वस्तु द्वारा एक दोलन पूरा करने में जितना समय लगता है, उसे आवर्तकाल कहते हैं। इसका SI मात्रक सेकण्ड होता है।

प्रश्न 5. आयाम किसे कहते है?
उत्तर– कंपित वस्तु अपनी माध्य स्थिति से अधिकतम जिस दूरी तक जाती है, उसे उसका आयाम कहते हैं। इसे मीटर में मापा जाता है। आयाम, ध्वनि का ऊंचाई होता है।

प्रश्न 6. तरंगदैर्ध्य (Wavelength) किसे कहते है?
उत्तर– तरंग की लंबाई को तरंगदैर्ध्य कहते है। इसे लैम्डा(λ) से सूचित किया जाता है। इसका SI मात्रक मीटर (m) होता है।

ध्वनि की चाल (v), आवृत्ति (ν), और तरंगदैर्ध्य (λ) के बीच संबंध है:

प्रश्न 7. सोनिक बूम किसे कहते है?
उत्तर– जब कोई वस्तु (जैसे – फाइटर जेट या गोली) हवा में ध्वनि की गति से भी तेज़ चलती है, तो वो बहुत तेज़ आवाज़ पैदा करती है। इसी आवाज़ को सोनिक बूम कहते हैं।

प्रश्न 8. पराध्वनिक चाल किसे कहते है?
उत्तर– जब कोई वस्तु वायु में ध्वनि की चाल (लगभग 330 m/s) से अधिक गति से चलती है, तो उसकी गति को पराध्वनिक चाल (Supersonic Speed) कहते हैं। उदाहरण: फाइटर जेट, गोली, रॉकेट

प्रश्न 9. प्रघाती तरंगें किसे कहते है?
उत्तर– जब कोई वस्तु (जैसे विमान, फाइटर जेट या गोली) ध्वनि की चाल से भी अधिक गति से चलती है, तो वह हवा में तेज़ झटके जैसी तरंगें उत्पन्न करती है। इन्हीं अचानक बनने वाली तीव्र तरंगों को प्रघाती तरंगें (Shock Waves) कहते हैं।

विभिन्न ध्वनियाँ हमें भिन्न-भिन्न क्यों प्रतीत होती हैं।

हमें अलग-अलग ध्वनियाँ अलग-अलग इसलिए लगती हैं क्योंकि उनकी गुणवत्ता (quality), आवृत्ति (frequency), और गूंज या तारत्व (pitch) अलग होती है।

(i) आवृत्ति (Frequency) :- इससे पता चलता है कि आवाज़ पतली है या भारी। सीटी की आवाज़ पतली होती है, ढोल की आवाज़ भारी होती है।

(ii) गूंज (Pitch) :- गूंज यह बताता है कि आवाज़ कितनी ऊँची (पतली / तीखी) या नीची (भारी / गहरी) सुनाई देती है। महिलाओं की आवाज़ आमतौर पर ऊँची पिच की होती है, जबकि पुरुषों की आवाज़ गहरी यानी नीची पिच की होती है।

(iii) प्रबलता :-  इससे पता चलता है कि आवाज़ तेज़ है या धीमीलाउडस्पीकर की आवाज़ तेज़ और धीरे बोलने पर आवाज़ धीमी होती है।

प्रश्न 10. श्रव्य ध्वनि (श्रव्य परास) किसे कहते है?
उत्तर– जिन ध्वनि को हमारा कान सुन सकता है, उस ध्वनि को श्रव्य ध्वनि कहते है। और मानव 20 Hz से 20,000 Hz तक सुन सकता हैं।

प्रश्न 11. अवश्रव्य ध्वनि किसे कहते है?
उत्तर– 20 Hz से कम की आवाज़ को हमारा कान नहीं सुन सकता है, इसे अवश्रव्य ध्वनि कहते है। और इसे कुत्ता, बिल्ली जैसे जानवर सुन सकते हैं। जैसे- भूकम्प के समय पृथ्वी के कम्पन की ध्वनि

प्रश्न 12. पराश्रव्य ध्वनि किसे कहते है?
उत्तर– 20,000 Hz से ज़्यादा की आवाज़ को हमारा कान नहीं सुन सकता है, इसे पराश्रव्य ध्वनि कहते हैं। जैसे– चमगादड़ और कुछ मशीनें की आवाज

प्रश्न 13. ध्वनि का परावर्तन किसे कहते है?
उत्तर– जब आवाज़ किसी ठोस सतह से टकराकर लौटकर वापस आती है, तो उसे ध्वनि का परावर्तन कहते हैं।

ध्वनि चाहे अनुप्रस्थ हो या अनुदैर्ध्य हो, दोनों के परावर्तन पर दो नियम लागू होते हैं:-

(i) आपतित ध्वनि, परावर्तित ध्वनि और अभिलंब तीनों एक ही समतल (plane) में होते हैं।

☞ जब ध्वनि किसी सतह से टकराती है, तो टकराने वाली ध्वनि (आपतित ध्वनि), लौटने वाली ध्वनि (परावर्तित ध्वनि), और एक सीधी रेखा जो टकराने की जगह पर खड़ी होती है (अभिलंब), ये तीनों एक ही सतह पर होते हैं।

(ii) आपतन कोण (अभिलंब तथा आपतित ध्वनि के बीच का कोण) और परावर्तन कोण (अभिलंब और परावर्तित ध्वनि के बीच का कोण) बराबर होते हैं।

प्रश्न 14. स्टेथोस्कोप किसे कहते है?
उत्तर– जिस यंत्र की सहायता से डॉक्टर कान में लगाकर दिल की धड़कन को सुनता हैं, उसे स्टेथोस्कोप कहते हैं। एक मिनट में दिल लगभग 60 से 100 बार धड़कता है।

☛ दिल की धड़कन या नसों में बहते खून की आवाज़ बहुत धीमी होती है। अगर हम सीधे कान लगाकर सुनें, तो वह आवाज़ साफ़ नहीं आती। लेकिन जब डॉक्टर चोंगा को दिल पर रखते हैं, तो आवाज़ नली के अंदर से होती हुई कान तक पहुँचती है।

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➢ हॉर्न, बिगुल, मेगाफोन और लाउडस्पीकर इस तरह बनाए जाते हैं कि आवाज़ ज़्यादा तेज़ हो और दूर तक पहुँचे। इनका मुँह आगे की ओर फैला हुआ (शंकु जैसा) होता है।

कर्णतूर्य (Ear Trumpet) या Hearing Aid = यह उन लोगों के लिए होता है जो कम सुन पाते हैं। इसका एक सिरा चौड़ा होता है और दूसरा सिरा संकीर्ण (छोटा)। जब आवाज़ इस यंत्र पर पड़ती है, तो वह छोटे से रास्ते से होकर कान तक जाती है। इससे आवाज़ केंद्रित होकर कान के अंदर ज़्यादा ताकत से पहुंचती है, जिससे कमज़ोर कान भी अच्छी तरह सुन सकता है।

प्रश्न 15. अनुरणन किसे कहते है?
उत्तर– जब मूल आवाज़ (main sound) खत्म हो जाती है, तब भी उसकी झलक या गूंज कुछ समय तक सुनाई देती है, तो इसे अनुरणन कहते हैं। जैसे– बड़े हॉल में तालियां बजने के बाद भी थोड़ी देर तक उसकी आवाज़ गूंजती रहती है।

☞ अनुरणन को कम करने के लिए सभा, भवन या हॉल की दीवारों पर ऐसे पदार्थ लगाए जाते हैं, जो ध्वनि को सोख (अवशोषित) लें। जैसे– फाइबर बोर्ड, मोटे पर्दे, ध्वनि-रोधक सीटें

प्रश्न 16. प्रतिध्वनि (Echo) किसे कहते है?
उत्तर– जब आप किसी कुएं, गुंबद, या पहाड़ के सामने जोर से बोलते हैं, तो थोड़ी देर बाद वही आवाज़ दोबारा सुनाई देती है, इसे प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं। ऐसा तब होता है जब आपकी आवाज़ किसी दीवार या पहाड़ी जैसी सतह से टकराकर वापस लौटती है।

प्रतिध्वनि के उपयोग

(i) ध्वनि की चाल पता करने में :- किसी दीवार या पहाड़ के सामने आवाज़ देकर, आवाज़ के जाने-आने में लगे समय से हवा में ध्वनि की चाल निकाली जाती है।

☛ आवाज़ जाकर लौट आती है, इसलिए दूरी को 2 से गुणा करते हैं। इस तरह हम लगभग हवा में ध्वनि की चाल का पता लगा सकते हैं।

(ii) चमगादड़ द्वारा रास्ता ढूँढ़ने में :- चमगादड़ बहुत खास जीव हैं। यह बहुत ऊँची आवृत्ति (100,000 Hz) की ध्वनि तरंगें पैदा कर सकते हैं। जिसे इंसान सुन नहीं सकता है। चमगादड़ उड़ते समय ये तरंगें आगे भेजते हैं।

☞ जब कोई वस्तु (जैसे दीवार, पेड़, कीड़ा) सामने आती है, तो ये तरंगें टकराकर वापस लौटती हैं। जिससे चमगादड़ पता लगा लेते हैं कि सामने कोई वस्तु है या नहीं। और उसकी दूरी का अनुमान लगा लेते हैं और उससे बचकर उड़ जाते हैं।

(iii) चिकित्सा में (डॉक्टरों द्वारा) :- दिल और शरीर के अंदरूनी अंगों की जाँच में ध्वनि की प्रतिध्वनि का उपयोग किया जाता है।

(iv) समुद्र की गहराई मापने में :- जहाज़ों में भेजी गई ध्वनि तरंगें समुद्र तल से टकराकर लौटती हैं। लौटने के समय से समुद्र की गहराई पता चलती है।

(v) डूबे जहाज़ और पनडुब्बी खोजने में :- समुद्र में छिपी चीज़ों का पता प्रतिध्वनि से लगाया जाता है।

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☛ इकोकार्डियोग्राफी = इकोकार्डियोग्राफी एक ऐसा जांच है, जिसमें डॉक्टर हृदय की जांच करते हैं। इसमें बहुत तेज़ ध्वनि तरंगें दिल की तरफ भेजी जाती हैं। और ये तरंगें दिल से टकराकर वापस आती हैं। तथा कंप्यूटर इन लौटती तरंगों से दिल के हर भाग की तस्वीर बना लेता है। इससे डॉक्टर को दिल की चाल, धड़कन और किसी खराबी का पता चल जाता है।

☞ अल्ट्रासोनोग्राफी = अल्ट्रासोनोग्राफी एक ऐसा जांच है, जिसमें शरीर के अंदर के किसी विशेष अंग (जैसे पेट, किडनी, बच्चा आदि) को देखने के लिए की जाती है। इसमें पराश्रव्य तरंगें शरीर के अंदर भेजी जाती हैं। और कंप्यूटर इन तरंगों से उस अंग की अंदरूनी तस्वीर बना देता है।

⪼ पराश्रव्य तरंगों की तरंग की लंबाई (wavelength) बहुत छोटी होती है। हवा में इनकी तरंग की लंबाई लगभग 1.65 cm से भी कम होती है। यह तरंगें बहुत छोटी होती हैं, इसलिए इसका उपयोग अल्ट्रासाउंड, सफाई, मशीनें जाँचना आदि में होता है।

पराश्रव्य तरंगों के उपयोग

(i) चिकित्सा में (अल्ट्रासाउंड जाँच) :- डॉक्टर पेट, किडनी, गर्भ में पल रहे बच्चे आदि को देखने के लिए पराश्रव्य तरंगों का उपयोग करते हैं। तथा मस्तिष्क में ट्यूमर का पता लगाया जाता है।

(ii) पथरी तोड़ने में :- बिना ऑपरेशन के, पराश्रव्य तरंगों से किडनी की पथरी के छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए जाते हैं। और आँख के मोतियाबिंद को हटाने में भी इन तरंगों का प्रयोग होता है।

(iii) रासायनिक काम (स्कंदन) :- जब किसी द्रव में छोटे कण तैर रहे होते हैं, तो पराश्रव्य तरंगें उन्हें आपस में जोड़कर नीचे बैठा देता हैं। इसे स्कंदन कहते हैं। 

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(iv) मशीनों और गहनों की सफाई में :- घड़ियों के छोटे पुर्ज़े, गहने और मशीन के भागों को गहराई से साफ़ किया जाता है।

(v) धातुओं में दरार ढूँढ़ने में :- पुल, मशीन, रेल की पटरी आदि में अंदर की दरार पता करने के लिए इन तरंगों का उपयोग होता है।

(vi) समुद्र की गहराई मापने में (SONAR –Sound Navigation And Ranging)। SONAR तकनीक द्वारा समुद्र की गहराई और समुद्र में छिपी वस्तुओं (जैसे – चट्टानों, हिम शैल, डूबे हुए जहाजों तथा पनडुब्बी आदि) का पता लगाया जाता है।

मानव कान

प्रश्न 17. कान किसे कहते है?
उत्तर– ध्वनि को हम जिस ज्ञानेन्द्रिय द्वारा सुनते हैं, उसे कान कहते हैं। और कान के मुख्यतः तीन भाग होते है- बाहरी (बाह्य) कान, मध्य कान तथा आन्तरिक कान।

(i) बाहरी कान (Outer Ear) = इसमें दो भाग होते हैं। कर्ण पल्लव (बाहर का हिस्सा, जो आवाज़ को पकड़ता है) और कर्ण नलिका (एक सुरंग जैसी नली जो आवाज़ को अंदर भेजती है)। इसका काम आवाज़ को पकड़कर अंदर के हिस्सों तक पहुँचाना है।

(ii) मध्य कान (Middle Ear) = इसमें तीन छोटी हड्डियाँ होती हैं, जिन्हें मुग्दरक, निहाई , वलयक कहते है। ये हड्डियाँ आवाज़ को ज़्यादा ताकत देकर अगले भाग तक भेजती हैं।

☛ कर्ण पट :- नलिका के सिरे पर एक पतली झिल्ली दृढ़ता से तनी रहती है, जिसे कर्ण पट कहते हैं। जब ध्वनि कंपन कर्ण पटह तक पहुंचती है, तब कर्ण पटह भी कंपित होने लगता है। और उसके बाद ही हम किसी वस्तु की ध्वनि को सुन पाते है।

(iii) आंतरिक कान (Inner Ear) = इसमें एक घोंघे जैसी नली होती है, जिसे कर्णावर्त कहते हैं। यह द्रव से भरी होती है। इसमें विशेष कोशिकाएँ होती हैं, जो श्रवण तंत्रिका से जुड़ी होती हैं। इसका काम आवाज़ के कंपन को विद्युत संकेतों (electric signals) में बदलकर मस्तिष्क को भेजना होता है।

कान कैसे काम करता है?

(i) जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह हवा में ध्वनि तरंगें बनाती है।

(ii) ये तरंगें बाहरी कान द्वारा पकड़ी जाती हैं और कर्ण नलिका से होती हुई कर्णपट तक पहुँचती हैं।

(iii) कर्णपट इन तरंगों से कंपन करने लगता है। ये कंपन तीनों हड्डियों (मुग्दरक, निहाई, वलयक) में पहुँचते हैं।

(iv) हड्डियाँ मिलकर कंपन को और तेज़ और मज़बूत बना देती हैं। यह कंपन कर्णावर्त में चला जाता है, जहाँ तरल में लहरें बनती हैं।

(v) यह कंपन विद्युत संकेतों में बदलकर श्रवण तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक जाता है। मस्तिष्क इसे पहचानता है और हम कहते हैं – “अरे! ये तो घंटी की आवाज़ है!”

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दोस्तों उम्मीद करता हूं कि ऊपर दिए गए कक्षा 9वीं के भौतिक विज्ञान के पाठ 06 ध्वनि (Class 9th Sound) का नोट्स और उसका प्रश्न को पढ़कर आपको कैसा लगा, कॉमेंट करके जरूर बताएं। धन्यवाद !

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