आज के इस पोस्ट में हमलोग कक्षा 9वीं भौतिक विज्ञान का पाठ ‘गुरुत्वाकर्षण’ का नोट्स को देखने वाले है। Gravitation
| गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) |
👉 इटली के वैज्ञानिक गैलीलियों गैलिली ने पृथ्वी की ओर स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तुओं की गति का विस्तृत अध्ययन किया और बताया कि
(i) त्वरण की दिशा ऊर्ध्वाधरतः (ऊपर से नीचे) नीचे की ओर होती है। इसका मतलब जब कोई वस्तु ऊपर से छोड़ते हैं (जैसे पत्थर, किताब), तो वह सीधे नीचे ज़मीन की ओर गिरती है।
(ii) इसका परिमाण प्रत्येक वस्तु के लिए समान होता है। इसका मतलब पृथ्वी सभी वस्तुओं को एक ही दर से अपनी ओर खींचती है।
(iii) पृथ्वी की ओर गिरती हुई वस्तु का त्वरण उसके द्रव्यमान से स्वतंत्र होता है। इसका मतलब भारी वस्तु और हल्की वस्तु दोनों का एक साथ धरती पर गिरती है।
>> जब दो विभिन्न द्रव्यमान या क्षेत्रफल वाले वस्तुओं को वायु की उपस्थिति में गिराया जाता है, तो वह एक समान नीचे नहीं गिरती है। लेकिन निर्वात वाले जगह पर एक समय पर नीचे गिरता है।
रॉबर्ट बॉयल ने अपने वायु पंप के द्वारा गैलीलियो गैलिली की नियम का सत्यापन किया। निर्वात में सभी वस्तुओं का त्वरण एक समान होता है।
प्रश्न 1. गुरूत्वाकर्षण बल किसे कहते है?
उत्तर– ब्रह्मांड में स्थित दो आकाशीय पिंडों के बीच लगने वाले आकर्षण बल को गुरूत्वाकर्षण बल कहते है। गुरूत्वाकर्षण बल की खोज सर आइजैक न्यूटन ने की।
👉 1667 में न्यूटन ने बताया की ब्रह्माण्ड में प्रत्येक वस्तु एक दुसरे को एक बल द्वारा आकर्षित करती है, जिसे गुरुत्वाकर्षण बल कहते है।
प्रश्न 2. गुरुत्व बल किसे कहते है?
उत्तर– जिस बल के कारण पृथ्वी का केंद्र किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है, उस बल को गुरुत्व बल कहते है। इसे G से सूचित किया जाता है।
प्रश्न 3. समानुपाती (अनुक्रमानुपति) किसे कहते है?
उत्तर– जब दो पदार्थ समान रूप से बढ़ते या घटते है, तो उसे समानुपाती कहते है।
प्रश्न 4. व्युत्क्रमानुपाती किसे कहते है?
उत्तर– जब दो पदार्थ समान रूप से बढ़ते या घटते नहीं है, तो उसे व्युत्क्रमानुपाती कहते है।
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम
ब्रह्मांड में स्थित किन्ही दो पिंडो (वस्तु) के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल, द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती है। इसका मतलब ब्रह्मांड में कोई भी दो वस्तुएँ (जैसे पृथ्वी–चंद्रमा, सूर्य–पृथ्वी) एक-दूसरे को खींचती हैं। जितनी वस्तुएँ भारी होंगी, उतना ज़्यादा वे एक-दूसरे को खींचेंगी।
और लगने वाला बल वस्तुओं के दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब अगर दो वस्तुएँ पास-पास होंगी, तो उनके बीच का आकर्षण ज़्यादा होगा। अगर वे दूर-दूर होंगी, तो आकर्षण कम हो जाएगा।
माना कि A और B दो वस्तु है। और दोनों का द्रव्यमान m1 और m2 है। तथा दोनों के बीच की दूरी r और गुरुत्वाकर्षण बल f है, तो न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार,

प्रश्न 5. गुरूत्वीय त्वरण किसे कहते है?
उत्तर– जब कोई वस्तु ऊपर से छोड़ी जाती है, तो वह पृथ्वी की ओर गिरती है। गिरते समय उसकी गति हर सेकंड बढ़ती जाती है। इस गति के बढ़ने की दर को ही गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। इसे g से सूचित किया जाता है।
(i) इसका मात्रक मीटर/सेकेंड 2 है।
(ii) पृथ्वी की सतह पर g का मान 9.8 मीटर / सेकेंड 2 होता है।
(iii) यह एक सदिश राशि है।
(iv) इसकी दिशा सदैव पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।
(v) गुरूत्वीय त्वरण वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।

गुरुत्वीय त्वरण निम्नलिखित पर निर्भर करता है–
(i) उँचाई और गहराई का प्रभाव – जब हम पृथ्वी की सतह से ऊपर या नीचे जाते हैं, तो गुरुत्वीय त्वरण का मान घटता है। और पृथ्वी के केन्द्र पर पहुँचने पर g का मान शून्य (0) होता है।
(ii) पृथ्वी के आकर का प्रभाव– पृथ्वी की सतह के नीचे जाने पर गुरुत्व त्वरण का मान घटता है। ध्रुवों पर गुरुत्वीय त्वरण का मान सबसे अधिक होता है। तथा विषुवत रेखा में कम होता है।
प्रश्न 6. भार (Weight) किसे कहते है?
उत्तर– किसी वस्तु का भार उसके द्रव्यमान तथा गुरुत्व त्वरण गुणनफल के बराबर होता है। भार का SI मात्रक न्यूटन ( N ) होता है।
W (भार) = m (द्रव्यमान) × g (त्वरण)
द्रव्यमान और भार में अंतर
(i) वस्तु का द्रव्यमान निश्चित होता है। जबकि वस्तु का भार, विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग होता है।
(ii) द्रव्यमान में केवल परिमाण होता है, इसलिए द्रव्यमान एक अदिश राशि है। जबकि भार में परिमाण और दिशा दोनों होता है, इसलिए भार एक सदिश राशि है।
(iii) द्रव्यमान को दंड तुला द्वारा मापा जाता है, जबकि भार को कमानीदार तुला द्वारा मापा जाता है।
👉 क्षेत्रफल को कम करके दाब को बढ़ाया जाता है। और क्षेत्रफल को ज्यादा करके दाब को घटाया जाता है। जैसे– चाकू, आरी, कुल्हाड़ी, सुई आदि का क्षेत्रफल कम होता है, जिससे कम बल लगाने पर अधिक दाब लगता है।
प्रश्न 7. घनत्व किसे कहते है?
उत्तर– किसी वस्तु के अंदर कितना द्रव्यमान भरा होता है, यह घनत्व बताता है। घनत्व का SI मात्रक kg/m³ होता है।
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
प्रश्न 8. प्रणोद (Force) किसे कहते है?
उत्तर– बल वह कारक है जो किसी भी रुकी या थम्मी हुई वस्तु में परिवर्तन ला देता है। प्रणोद का SI मात्रक न्यूटन ( N ) होता है।
दाब = प्रणोद / क्षेत्रफल
किसी पृष्ठ के पूरे क्षेत्रफल पर लंबवत लगे हुए बल को प्रणोद (thrust) कहते है, जबकि उस पृष्ठ के एकांक क्षेत्रफल पर लगे हुए बल को दाब (pressure) कहते हैं।
द्रवों में दाब का संचरण (पास्कल का नियम)
पास्कल के नियम के अनुसार, किसी बन्द पात्र में भरे द्रव के किसी भाग पर आरोपित दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित होता है।
प्रश्न 9. उत्प्लावन बल किसे कहते है?
उत्तर– जब किसी वस्तु को द्रव में डुबोते है, तो क्स्तु पर द्रव द्वारा ऊपर की ओर एक बल कार्य करता है, जिसे उत्प्लावन कहते है।
आर्किमिडीज का सिद्वान्त
आर्किमिडीज का सिद्धान्त कहता है कि— जब कोई वस्तु किसी द्रव (पानी आदि) में पूरी या आंशिक (हल्का डूबा) रूप से डुबोई जाती है, तो उस वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगता है। यह बल उस द्रव के भार के बराबर होता है, जितना द्रव वस्तु ने हटाया है।
वस्तुओं का प्लवन (Floating) = जब किसी वस्तु को किसी द्रव (जैसे पानी) में डुबाया जाता है, तो उस वस्तु पर दो बल (forces) लगते हैं—
(i) वस्तु का भार (W₁) = यह बल नीचे की ओर लगता है और यह वस्तु को डुबाने की कोशिश करता है।
(ii) उत्प्लावक बल / उत्प्लावकता (W₂) = यह बल ऊपर की ओर लगता है, और यह वस्तु को डुबने से रोकता है। यह उस द्रव के भार के बराबर होता है।
👉 W₁ और W₂ के आधार पर तीन स्थितियाँ होती है।
(क) जब वस्तु का भार अधिक हो (W₁ > W₂) = नीचे की ओर बल अधिक होगा और वस्तु द्रव में डूब जाएगी।
उदाहरण: लोहे का टुकड़ा पानी में डूब जाता है, क्योंकि लोहे का घनत्व पानी से अधिक होता है।
(ख) जब दोनों बल बराबर हो (W₁ = W₂) = परिणामी बल शून्य होगा और वस्तु द्रव में पूरी तरह डूबी रहकर तैरती रहेगी, इसे पूर्ण प्लवन कहते हैं।
(ग) जब उत्प्लावक बल अधिक हो (W₁ < W₂) = ऊपर की ओर बल अधिक होगा। वस्तु ऊपर उठेगी और आंशिक (हल्का डूबा) रूप से तैरेगी।
उदाहरण: लकड़ी का टुकड़ा पानी में आधा डूबकर तैरता है।
लकड़ी और लोहे का उदाहरण
लकड़ी का घनत्व, पानी से कम होता है, इसलिए लकड़ी तैरती है और लोहे का घनत्व पानी से अधिक होता है, इसलिए लोहा डूब जाता है।
उत्प्लावक बल के उपयोग
(i) मनुष्य का पानी में तैरना — उत्प्लावक बल के कारण मनुष्य पानी में तैर पाता है, क्योंकि पानी उस पर ऊपर की ओर बल लगाता है। लेकिन सिर का घनत्व अधिक होता है, इसलिए सिर डूबने लगता है, सिर को पानी के बाहर रखकर चलने को तैरना कहते हैं।
(ii) नौका और जहाज का तैरना — भारी होने पर भी नाव और जहाज पानी में तैरते हैं, क्योंकि उन पर लगने वाला उत्प्लावक बल उनके भार को संतुलित करता है।
(iii) समुद्र में तैरना आसान होना — समुद्र के पानी का घनत्व नदी या झील के पानी से अधिक होता है, इसलिए शरीर का अधिक भाग पानी के बाहर रहता है और तैरना आसान होता है।
(iv) बर्फ (प्लावी हिमशैल) का पानी पर तैरना — बर्फ का घनत्व पानी से कम होता है, इसलिए उत्प्लावक बल के कारण बर्फ पानी पर तैरती है। 1912 में टाइटैनिक जहाज एक प्लावी हिमशैल से टकराकर डूब गया।
(v) पनडुब्बी का ऊपर-नीचे जाना — पनडुब्बी उत्प्लावक बल को घटा–बढ़ाकर पानी में डूबती और ऊपर आती है।
👉 आपेक्षिक घनत्व का मतलब है— किसी वस्तु की तुलना पानी से करना कि वह पानी से कितनी भारी या हल्की है।
प्रश्न 10. आपेक्षिक घनत्व किसे कहते है?
उत्तर– किसी वस्तु के घनत्व और 4°C पर पानी के घनत्व के अनुपात को आपेक्षिक घनत्व कहते हैं। आपेक्षिक घनत्व का कोई मात्रक नहीं होता है। और यह सिर्फ तुलना बताता है।
आपेक्षिक घनत्व = वस्तु का घनत्व / 4°C पर पानी का घनत्व
यदि किसी वस्तु का आपेक्षिक घनत्व 1 से कम है → वस्तु पानी में तैरेगी। यदि आपेक्षिक घनत्व 1 से अधिक है → वस्तु पानी में डूबेगी।
जैसे— लकड़ी → आपेक्षिक घनत्व कम → तैरती है।
लोहा → आपेक्षिक घनत्व अधिक → डूब जाता है।
घनत्व और आपेक्षिक घनत्व में अंतर
(i) घनत्व बताता है कि कोई वस्तु कितनी भारी है, जबकि आपेक्षिक घनत्व बताता है कि वह वस्तु पानी से भारी है या हल्की।
(ii) घनत्व का मात्रक होता है, जबकि आपेक्षिक घनत्व का कोई मात्रक नहीं होता।
(iii) घनत्व से वस्तु की वास्तविक सघनता पता चलती है, जबकि आपेक्षिक घनत्व से यह पता चलता है कि वस्तु पानी से भारी है या हल्की।
(iv) घनत्व सीधे मापा जा सकता है, जबकि आपेक्षिक घनत्व अनुपात के रूप में तुलना किया जाता है।
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दोस्तों उम्मीद करता हूं कि ऊपर दिए गए कक्षा 9वीं के भौतिक विज्ञान के पाठ 04 गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) का नोट्स और उसका प्रश्न को पढ़कर आपको कैसा लगा, कॉमेंट करके जरूर बताएं। धन्यवाद !









